सुद महादेब
वेदों के अनुसार यहाँ पर भगवान शिव और सिदान्त राक्षस का घोर युद्ध हुआ था।
और अंत में सिद्धांत मारा गया तो मरते समय भगवान शिव से वर मांगा कि मुझे मुक्ति दें ।
तब भगवान शिव ने उसे वरदान दिया कि मेरे नाम के साथ तेरा भी नाम इस स्थान पर प्रसिद्ध होगा तभी यहां नाम सुदमहादेब पडा।
आज पूरे देश से यहां पर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं ।
आषाढ मास में गूरू पूर्णिमा के दिन यहां पर एक भव्य मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं यहां पर पाप नाशनी बावली में स्नान करने से पापों का नाश होता है ।
यहां पर गौरी कुंड में यहां माता पार्वती स्नान करती थी बहां पर स्नान करने का भी विशेष महत्व है । एक बार अवश्य आएं सुदमहादेब।
जम्मू से 150 किलोमीटर पर स्थित है सुदमहादेब मन्दिर जम्मू कश्मीर में सबसे प्राचीन मंदिर है
पं पुरूषोत्तम शर्मा
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